24 नवंबर 2018 - 13:13
ईरानः हम सीरिया, इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और यमन की तरह सऊदी अरब की भी सहायता के लिए तैयार हैं

तेहरान में 32वें एकता सम्मेलन का आरंभ राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी के भाषण से हुआ। डाक्टर रूहानी ने सम्मेलन का उदघाटन भाषण देते हुए पैग़म्बरे इस्लाम और उनके पौत्र हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस की बधाई देते हुए कहा कि यह भव्य सम्मेलन पैग़म्बरे इस्लाम के नाम से और उनसे बैअत करने तथा उनके मार्ग पर चलने की प्रतिज्ञा के लिए है।

डाक्टर रूहानी ने कहा कि यह सही है कि पैग़म्बरे इस्लाम मुसलमानों के लिए बंधुत्व का संदेश लाए लेकिन उन्होंने इसके साथ ही सारी दुनिया को मेल मुहब्बत से साथ रहने का तरीक़ा बताया, इस्लाम सभी धर्मों तथा समस्त मानवीय मूल्यों का सम्मान करने वाला धर्म है।

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि आज हम मुसलमानों का गौरव यह है कि हम पैग़म्बरे इस्लाम के शिष्टाचार और महान शिक्षाओं का अनुसरण करें।

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि आज हमारे इलाक़े के हालात बहुत कठिन हैं, फ़िलिस्तीन से लेकर लीबिया, सीरिया, यमन यहां तक कि अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और इराक़ तक जो हालात हैं वह इस्लामी समाज की अपेक्षा के अनुरूप नहीं हैं।

डाक्टर रूहानी ने संयुक्त राष्ट्र संघ के ढांचे का विशलेषण करते हुए कहा कि यह संस्था दूसरे विश्व युद्ध के बाद ताक़त की बुनियाद पर गठित हुई जिसके बाद अधिक ताक़त है उसके वोट और इच्छा का महत्व अधिक है, जिसके पास दूसरों से अधिक सैनिक शक्ति है उसे वीटो का अधिकार हासिल है। डाक्टर रूहानी ने कहा कि उस समय जिन पांच देशों के पास परमाणु शक्ति थी उन्हें वीटो का अधिकार मिल गया क्या दुनिया के देश इस स्थिति से सहमत हैं?

डाक्टर रूहानी ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध का हमारे इलाक़े में एक और दुष्परिणाम  इस्राईल नामक नासूर है इसे इसलिए अस्तित्व दिया गया कि पश्चिम को हमारे इलाक़े के राष्ट्रों पर उसे भरोसा नहीं था और न ही उसे इस इलाक़े में मौजूद पिट्ठू सरकारों पर भी पश्चिम को विश्वास नहीं था इसलिए पश्चिमी सरकारों ने इस इलाक़े में एसे शासन का गठन कर दिया जो पूरी तरह उनकी बात माने।

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि अमरीका और ब्रिटेन ने पहले संयुक्त राष्ट्र संघ अपने लिए वीटो पावर सुनिश्चित किया और उसके बाद जाली शासन इस्राईल के गठन की घोषणा की।

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि हम मुसलमानों के पास पश्चिम और विशेष रूप से अमरीका की साज़िश का मुक़ाबला करने के दो ही रास्ते हैं या तो वह इस्लाम और पैग़म्बरे इस्लाम का अनुसरण छोड़ दें और पश्चिम के सामने सिर झुका दें या फिर अपनी पूरी शक्ति से अत्याचार के मुक़ाबले में डट जाएं।

डाक्टर रूहानी ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध का हमारे इलाक़े में एक और दुष्परिणाम  इस्राईल नामक नासूर है इसे इसलिए अस्तित्व दिया गया कि पश्चिम को हमारे इलाक़े के राष्ट्रों पर उसे भरोसा नहीं था और न ही उसे इस इलाक़े में मौजूद पिट्ठू सरकारों पर भी पश्चिम को विश्वास नहीं था इसलिए पश्चिमी सरकारों ने इस इलाक़े में एसे शासन का गठन कर दिया जो पूरी तरह उनकी बात माने।

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि अमरीका और ब्रिटेन ने पहले संयुक्त राष्ट्र संघ अपने लिए वीटो पावर सुनिश्चित किया और उसके बाद जाली शासन इस्राईल के गठन की घोषणा की।

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि हम मुसलमानों के पास पश्चिम और विशेष रूप से अमरीका की साज़िश का मुक़ाबला करने के दो ही रास्ते हैं या तो वह इस्लाम और पैग़म्बरे इस्लाम का अनुसरण छोड़ दें और पश्चिम के सामने सिर झुका दें या फिर अपनी पूरी शक्ति से अत्याचार के मुक़ाबले में डट जाएं।

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि हमें 450 अरब डालर भी नहीं चाहिए और हम आपका अपमान भी नहीं करेंगे जिस तरह हमने इराक़, सीरिया, अफ़ग़ानिस्तान और यमन की जनता की फौरन मदद की सऊदी अरब की जनता के हितों की भी रक्षा करेंगे।

डाक्टर रूहानी ने कहा कि हम आपको अपना भाई और मक्के और मदीने के लोगों को अपना बंधु मानते हैं। न ईरान से डरने की ज़रूरत है और न इस्लाम से घबराने की आवश्यकता है।

राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि यदि शीया सुन्नी एकजुट हो जाएं तो अमरीका और इस्राईल के मुक़ाबले विजय निश्चित है।